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तू मुझे याद तो कर कविता,


तू मुझे याद तो कर. तू एक बार ही सही मुझे याद कर गलती से ही सही. एक बार याद तो कर. तेरे इन्तजार में कब से बेटी हू मे. ना तेरे सिवा कुछ दिखाई देता. लेकिन परेसान तो मे यू हू. की तू भी दिखाई नहीं देता. देखना चाहती है सिर्फ ये नज़रे तुझे. बस गए है मेरे कर्ण. केवल सुनाने को तेरी प्यारी सी आवाज. तू एक बार ही सही मुझे याद तो कर. क्या तेरे लिए. इतना भी सम्भव नहीं है. के तू मुझे याद ही कर सके. किस्से डरता है और क्यू डरता है? ना तेरी दोलत चाहिए. ना ही मुझे कुछ और चाहिए. तम्मना तो बस एंटनी सी है. की एक बार ही सही तू मुझे याद तो कर. चाहे गलती से ही सही तू मुझे याद तो कर.